Tuesday, July 3, 2012

दबंग..

उसने क्या जाना था किस तुफान से पडा है पाला..
जिते होंगे देश कई मै तो दिलोको जितनेवाला..
कहा जित पाया मुझे मारकर औरंग..
मरकर जिंदा रहे वो है सबसे बडा दबंग..।।
जब जब मै याद आयातबतब हिंदुस्थान रोया..
सोचो जरा मरहठ्ठोने क्या खोया और क्या पाया..
पुछ लेना उसे बतायेंगा वो वधस्थंभ..
फौलाद पिघला दे जंजिरोका वो है सबसे बडा दबंग..।।
कैद मे पकड शैतानोने जखडा था..
आलमगीर कहलानेवाला सामने आने से डरता था..
देख मुझे सामने कापं उठा उसका अंग अंग..
जिसका कभी नही झुकता सर वो है सबसे बडा दबंग..।।
झुक नही सकता किसीके सामने..
ऐसे तुफाण पालते है सिनेमे..
पाव रखदे अगर तिलमिला जाये मैदान ए जंग..
जिंदगी को जो रण बनाये वो है सबसे बडा दबंग..।।
शोला बनके टकराया पिघल गया जंजिरा..
समंदर भी तेवर बदले देख अंदाज मेरा..
लहरोसे उठ गयी दहकते शोलो कि तरंग..
ठहरा दे समंदर का पाणि वो है सबसे बडा दबंग..।।
ये दुनिया मरहठ्ठोकि दिवानी है..
धरतिपर एक हि ऐसी कहानी है..
अपने बलिदान से कर दिय जिसे बुलंद..
मौत मरजाये देख जिसे वो है सबसे बडा दबंग..।।
मौतसे मौत का खेल खेला है..
दर्द कि सिमावोको इंतेहा तक झेला है..
जबान जिसकि कटकर भी कहे जगदंब..
टुकडो मे बटा स्वराज्य के लिये वो है सबसे बडा दबंग..।।
गद्दारो के घाव सिने पे झेले है..
अपने समजकर आस्तिनके साप पाले है..
शत्रु के खुनसे जो धरती को कर देबेरंग..
भगवे का दर्द सिने मे जले वो है सबसे बडा दबंग..।।
हर गलती कि नही मिलती माफी..
साजिश के अमन पे जहर नही था काफी..
कई बार अपने भी लढे थे जिसके संग..
तोडे जो हर साख को वो है सबसे बडा दबंग..।।
शेर शिवबा का छावा था..
उबलता हुआ लाव्हा था..
डर जाता जिसे देख के रण रण..
धरति फाड के निकले वो है सबसे बडा दबंग..।।
एक ईतिहास ऐसा है मेरा..
भुल नही पायेगा संसार सारा..
इन्सान तो इन्सान भगवान भि रह गये दंग..
हा मै हि हु ईस संसार का सबसे बडा दबंग..

No comments:

Post a Comment